Sunday , September 22 2019
Breaking News

उत्कृष्ट परंपरा एवं दिव्य विरासत है जैन धर्म – गच्छाधिपति श्री

पिपलौदा / (प्रफुल जैन) – पावनिय चातुर्मास महोत्सव के दौरान श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम पर गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा.ने कहा कि उत्कृष्ट परंपरा एवं दिव्य विरासत का नाम है जैन धर्म । जीव मात्र का कल्याण, मोक्ष रूपी अनंत सुख व आत्मा को पवित्र और पावन बनाने के साथ ही कुदरत के नियमो को तोड़े बगैर,प्रकर्ति से, प्रत्येक जीव से,समन्वय बनाकर जीने की राह दिखाता है यह धर्म जो अनादिकाल से चला आ रहा है व अनंतकाल तक चलता रहेगा अहिंसा,करुणा व मैत्री भाव की जो व्याख्या जैन धर्म मे की गई है वह अन्यत्र दुर्लभ है साथ ही बताया कि प्रत्येक संयोग के साथ वियोग लगा हुआ है परंतु प्रत्येक वियोग के तिलक पर विरह रूपी कोयले की राख या चमकी लगी हुई नही होती देव गुरु धर्म की भक्ति में झूमते रहने प्रभु के वियोग में उन्हें स्मृति में लाकर विरह की व्यथा का अनुभव करने से जीवन मे चमत्कार सर्जित हो सकता है ।

मुनिराज श्री सिद्धरत्न विजय जी म.सा.ने उत्तराध्यन सूत्र के बारे में बताते हुए कहा कि समय का सदुपयोग करने वाला मानव गति कर प्रगति से उन्नति के शिखर तक पहुच जाता है जो संसारीयो का आभूषण है वह आराधको का दूषण है ओर जो आराधकों का आभूषण है वह संसारिको का दूषण है आराधक सजने सवरने में विश्वास नही रखते व संसारी तो बिना सजे सवेरे रह नही सकते एक राजा और मंत्री का उदाहरण देते हुए बताया कि उदगल नाशवान है आत्मा अमर है साथ ही बताया कि भौतिक साधनो के साथ ही बंगला मोटर व खाने की वस्तुओं को बनाने में पाप लगता है अतः उनकी प्रसंसा नही करना चाहिए प्रसंसा करने से पाप का बंध होता है जो दुखदायी है।
मुनिराज श्री विद्वदरत्न विजय जी म.सा.ने विक्रम चरित्र पर बोलते हुए बताया कि विक्रम ने अग्नि बेताल को उसके मन माफिक खिला पिला कर वश में कर अपनी आयुष के बारे में पूछा तब अग्नि बेताल ने अपने अवधी ज्ञान में देखकर विक्रम की उम्र सो साल बताकर कहा कि आपकी किन्ही भी कारणों से म्रत्यु नही हो सकती जिससे विक्रम अग्नि बेताल से लड़ने हेतु तैयार हो गया इस पर अग्नि बेताल उसकी शरण पाकर उनके आदेशो का पालन करने के लिए राजी हो गया।
मुनिराज तारकरत्न विजय जी म.सा.द्वारा आत्म भावना प्राथर्ना करवाई गई । मुनिराज प्रशमसेन विजय जी म.सा.,मुनिराज श्री निर्भयरत्न विजय जी म.सा. साध्वी श्री भाग्यकला श्री जी म.सा. आदि ठाणा उपस्थित थे।

ये रहे लाभार्थी – श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम प्रचार सचिव प्रफुल जैन ने बताया कि दादा गुरुदेव व पूण्य सम्राट की आरती का लाभ श्री राजेन्द्र सुरी जैन ट्रस्ट के गुरुभक्त चेन्नई मद्रास व प्रभावना का लाभ श्री संघ रेवतड़ा,राजगढ़,झाबुआ,टांडा, राणापुर व गवली का लाभ विजय कुमार अजय कुमार चन्द्रगोता परिवार ने लिया सभी लाभार्थीयो का विजय कुमार चन्द्रगोता परिवार द्वारा बहुमान किया गया।

चल रही तप आराधना – पावनिय चातुर्मास के अंतर्गत सांखली अठ्ठम एवं आयम्बिल के साथ ही , नटवर सिंह राठौर 16, टीना अभिषेक मोगरा 16 उपवास की तपस्या चल रही है साथ ही
श्रीमति लक्की ऋषभ धींग के 16 व नीतू प्रामिश जैन के 9 उपवास निमित्त उनके निवास स्थान से भव्य वरघोड़ा निकला जो मुख्य मार्ग से होते हुए जैन दादावाड़ी पहुँचा जहाँ सभी ने गच्छाधिपति श्री के दर्शन लाभ लिए व मधुकर भोजन मंडप में तपस्वी का पारणा हुआ।

श्री संघो ने की क्षमायाचना – श्री संघ झाबुआ से संजय मेहता, चेन्नई से शान्तिलाल टाइगर,टांडा से पारसमल तलेरा व सुरेशचन्द्र कोठारी,राजगढ़ से संजय मामा एवँ भीनमाल आदि श्री संघ ने गच्छाधिपति श्री व साधु साध्वी भगवंत का आशीर्वाद लेकर वार्षिक क्षमायाचना की साथ ही परम गुरु भक्त व जैन संगीतकार शैलेश जयंतीलाल परीख सूरत के आकस्मिक निधन पर शोक सवेंदना व्यक्त करते हुए पिपलोदा श्री संघ के साथ ही सभी ने नवकार का जाप कर श्रद्धांजलि अर्पित की संचालन चातुर्मास प्रभारी राकेश जैन व वाटिका उपाध्यक्ष शिखर बोहरा ने किया।

About Swastik Jain

Check Also

प्रमाद से कंकर व प्रयत्न से मिलता है रत्न – गच्छाधिपति श्री

पिपलौदा / (प्रफुल जैन) – पावनिय चातुर्मास महोत्सव के दौरान श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम पर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *