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अनंत उपकारी पुण्य सम्राट जयंत सेन सूरीश्वरजी के पट्टधरों का पारा में मंगल प्रवेश आज


भव्य शोभायात्रा में घर – घर से होगी गहुली

पारा / (प्रभाष जैन) – जन जन की आस्था के केंद्र, साहित्य साधना के शिखर पुरुष, दीक्षा दानेश्वरी, लोक संत, और पुण्य सम्राट जैसी सैकड़ो उपाधियों से अलंकृत जैनाचार्य श्रीमद विजय जयंत सेन सूरीश्वर जी के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी मसा एवं आचार्य देवेश जयरत्न सूरीश्वर जी मसा का आचार्य पद पर विराजमान होने के बाद पहली बार आज प्रातः 9 बजे से एक भव्य शोभायात्रा के साथ नगर में मंगल प्रवेश होगा। पारा जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष मनोहर लाल छाजेड़ ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि आचार्यद्वय के प्रवेश पर नगर के मुख्य मार्गो को सजाया गया हैं वहीं सम्पूर्ण श्रीसंघ राणापुर रोड पहुंच कर पलक पांवड़े बिछाए आपकी अगवानी करेगा। आपने बताया कि हम सभी के आस्था के केंद्र जिनके हृदय में पारा बसा हुआ था ऐसे गुरुदेव श्रीमद विजय जयंत सेन सूरिजी का देवलोक वैशाख कृष्ण सप्तमी सवंत 2073 को राजस्थान के भण्डावपुर तीर्थ में हो गया था।इसके बाद गुरुदेव के आदेशानुसार त्रिस्तुतिक पाट परम्परा को निभाते गच्छाधिपति आचार्य के रूप में गुरुदेव के प्रथम शिष्य नित्यसेन सूरीश्वरजी को एवं आचार्य पद पर भाण्डवपुर तीर्थोधारक जयरत्न सेन सूरीश्वर जी को मनोनीत किया गया है। 2017 के अहमदाबाद चातुर्मास को पूर्ण कर गच्छाधिपति एवं भाण्डवपुर में अपना चातुर्मास पूर्ण कर आचार्य जयरत्न सूरिजी पारा नगर में प्रथम बार मंगल प्रवेश करेंगे । आपके साथ मुनिमण्डल तथा पारा एवं रिंगनोद में अपना सफल चातुर्मास पूर्ण कर साध्वी भगवंत भी पारा पधार रही है।

 

उत्साह चरम पर

श्रीसंघ अध्यक्ष ने बताया कि आचार्यद्वय के प्रवेश को लेकर ना केवल जैन संघ बल्कि जेनेत्तर समाज मे भी मुनि भगवंतों के स्वागत और वंदन के लिए काफी उत्साह बना हुआ है। जिले के राणापुर नगर में जन्मे गच्छाधिपति का राणापुर से ही पारा नगर प्रवेश होगा जहां आचार्यों की अगवानी के बाद श्रीसंघ द्वारा एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा जिसमे समाज के प्रत्येक घर के गुरुदेव के समक्ष गहुली की जाएगी। इसके बाद आचार्यद्वय को काम्बली ओढ़ाकर उनकी वासक्षेप से गुरुपूजा की जाएगी उपरांत आचार्य भगवंतों एवं मुनि भगवंतों के प्रवचन होंगें।

 

वचनसिद्ध गुरु देव के पारा के लिए वचन

पारा सचमुच अपारा हो गया

1986 में अपने चातुर्मास के बाद वर्ष 2014 में गुरुदेव ने पारा में आदिनाथ-शंखेश्वर-सीमंधर जिनालय की अंजन शलाका एवं प्रतिष्ठा में अपनी निश्रा प्रदान की थी तब पारा के लिए वचन कुछ यूँ थे
एक पारा वह था जो कभी नक्शे में भी नही था, अब पारा वो है जो तेजी से बढ़ते अपारा हो गया। पारा ने हर क्षेत्र में अपना नाम बढ़ाते, पारा के प्रत्येक समाज ने अनेकता में एकता के संदेश देते पूज्य गुरुदेव की वाणी को सार्थक सिद्ध किया।

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