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तप, जप, क्रिया के साथ मनाई ज्ञान पंचमी

पारा / (प्रभाष जैन) – तप,जप,क्रिया के साथ मनाई ज्ञान पंचमी कार्तिक सुदी पंचमी,(ज्ञान पंचमी) दिवस ज्ञान की आराधना का दिन है।
तीर्थंकर भगवान् महावीर ने अपनी देशना में कहा है…
स्थाई सुख के साधन है…
ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप। ऒर
सुख में बाधा डालने वाले है…
क्रोध, मान, माया और लोभ।
ये ज्ञान की आराधना में बाधक कारण है,
अतः
अह पंचहिं ठाणेहिं,
जेहिं सिक्खा न लब्भइ ।
थंभा कोहा पमाएणं,
रोगेणालस्सए णय प ।।
अर्थात्:
अहंकार, क्रोध, प्रमाद, रोग और आलस्य…
ज्ञान-प्राप्ति में बाधक कारण है।
ज्ञानपंचमी दिवस की क्रिया-आराधना…
जिनालय में जाकर बच्चों द्वारा ज्ञान के उपकरण
पुस्तक काँपी, पैन, पैसिल आदि चढवाकर ज्ञान की वासक्षेप से पुजा करनी चाहिए।

आज से ज्ञान पंचमी की आराधना तप शुरू करने का विधान है,
जिसकी अवधि 5 वर्ष 5 माह होती है।

ज्ञान पंचमी की क्रिया
५१ – लोगस्स का काउस्सग
५१ – प्रदक्षिणा
५१ – खमासमणा
५१ – साथियाँ
“ऊँ ह्रीँ णमो नाणस्स”
इस पद की २० नवकार वाली, उपवास, आयंबिल, एकासना आदि तप से कर सामायिक, प्रतिक्रमण, देववंदन.करना चाहिए। इस दिन व्यापार की नई शुरुआत होती है।

पुण्य सम्राट लोकसंत आचार्य श्रीमद विजय जयंतसेंसुरीश्वरजी की सु शिष्या साध्वीजी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी ने बताया कि शिक्षा से आता ज्ञान, ज्ञान से मिलता सम्मान। मानव जीवन का वरदान, मानव की होती पहचान। अर्थात-ज्ञान सुख प्राप्त करने का साधन है।
यदि जीवन मे ज्ञान नही शिक्षा नही है तो उस जीवन का कोई अर्थ नही मानव जीवन उसी का ही सार्थक है। जिसमे ज्ञान है।ज्ञान के अभाव मे मनुष्य पशु के समान होता हैं।
“संकट आते रहते पल पल
शिक्षा है हर संकट का हल”
शिक्षा ऒर ज्ञान चरित्र को सुधरती है।अपना चरित्र और व्यवहार ज्ञान से ही महान बनता है जीवन के हर क्षेत्र में प्राप्त किया ज्ञान हमारी उन्नति में मुश्किलो के वक्त मदद करने में सहायक बनता है। इसलिये ज्ञान जीवन का आधार स्तम्भ है मनुष्य को ही केवल शिक्षा का वरदान मिला है। इसके द्धारा वह अपने जीवन को सवार सकते है। इस धरती पर जितने भी संत, महात्मा, ऋषि मुनि, पण्डित, आचार्य,गणधर, तीर्थंकर परमात्मा हुए है। वे सभी ज्ञान की वजह से हुए हैं । बुधवार को ज्ञान पंचमी पर ज्ञान के उपकरणो को गुरूमन्दिर में रखकर उन्हें आकर्षक रूप से सजाकर महिलाए अपने अपने घरों से अनाज, फल को अर्पण किया

ज्ञान की क्रिया प्रदीक्षंणा,खमसमणा, काउसग्ग, कर
ॐ ह्रीं नमो नाणस्य की 20 माला के जाप के साथ वसक्षेप, धूप, दीपक अक्षत, नैवेद्य, फल से पूजा कर आरती उतारी।
तपस्वियों ने ज्ञान की आराधना के साथ उपवास,आयम्बिल, एकासने से तप किये

देवनंदन
सुबह 8.30 बजे गुरूमन्दिर में साध्वीजी की निश्रा में ज्ञानकी आराधना्र्थ सु श्रावक राजेन्द्र जी कोठारी व
सु श्रावक अशोक जी छाजेड ने क्रिया कराइ।

वरघोड़ा
महिलाएं ज्ञानके उपकरणों ओर शास्त्रों को थाल में सजाकर सर पर रखकर साध्वीजी की निश्रा में ढोल धमाको के साथ वरघोड़ा निकला आगे रथ में भगवान की रजत प्रतिमा नवकार मन्त्र का रजत चित्र, व रजत कलश को लेकर चले
जहा सभी घरों से गहुली
की

पारा से सिद्धाचलजी संघ यात्रा

श्री सिद्धाचल यात्रा ट्र्स्ट के माध्यम से होगा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मनोहरलॉजी कर्णावट है
10 नवम्बर शुक्रवार को
तीन दिवसीय संघ सिद्धाचल की यात्रा के लिये प्रस्थान होगा।जिसमे सिद्धाचल जी तीर्थ के साथ कलिकुण्ड, अयोध्यापुरम, नवकार पार्श्वनाथ, मणीलक्ष्मी तीर्थ की यात्रा कर मंगलवार को संघ लौटेगा।

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One comment

  1. लाभ पंचमी का महत्व काफी अच्छे से बताया गया

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