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नगर में समाजजनों ने कल्पसूत्र ले कर चल समारोह निकला

रिंगनोद / (सारस जैन) – 20अगस्त गच्छाधिपति पूण्य सम्राट आचार्य श्रीमद विजय जयंतसेन सुरीश्वरजी म सा के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी म सा व आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सुरीश्वरजी म सा की आज्ञानुवर्ती  साध्वी श्री दर्शित कलाश्रीजी महाराज साहब, चिंतनकलाश्रीजी महाराज साहब ने आज अष्टाहनीका ग्रंथ के द्वितीय व्याख्यान में जंबूद्वीप सूर्योदय महाराजा का दृष्टांत बताया, जो जैन धर्म के पालक राजा थे !राजा भरत चक्रवर्ती का दृष्टांत बताया जिनके सौ भाई थे जिसमें से 99 भाईयो ने दीक्षा ग्रहण की एक बहन सुंदरी थी जिसने भी दीक्षा ली !सूर्ययस राजा का दृष्टांत जिनकी सेवा में इंद्र देवता रहते थे ,जो धर्म क्रिया करने करवाने में कोई समझौता नहीं करते थे ,देवी रंभा और उर्वशी ने राजा को धर्म से विमुख करने के कई प्रयास किए पर राजा को विचलित नहीं कर पाई,अंत में हार मान कर राजा के गुणगान गाए वह धैर्य की प्रशंसा करी! हर जैनी को अपने धर्म की रक्षा करना चाहिए, तप करना चाहिए यदि जीवन में तप नहीं कर सकते तो तप की अनुमोदना करें! गुणी बनो नहीं बन सकते तो गुणानुवाद करो !प्रभु वचन से जीवन महकाये, शास्वत के लिए साधना करें, जिन शासन की प्रभावना करते हुए प्रभु आज्ञा पालन करना ही धर्म है! कल सोमवार से कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ होगा इसमें नौ व्याख्यान होते हैं पूरे कल्पसूत्र को मात्र 8 बार सुनने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है! आज भक्तांबर प्रभावना महिला परिषद् प्रवचन प्रभावना अशोक कुमारजी आदेश कुमारजी चौधरी परिवार, आयंम्बिल लडी में श्रीमती मंजुला फूलफगर, अतिथि स्वामीभक्ति श्रीसंघ ने लाभ लिया!दोपहर मे चौबीसी दीपक कुमारजी प्रकाशचंदजी कोठारी परिवार शाम को कमलचंदजी बाबूलालजी डूंगरवाल परिवार के निवास स्थान पर रखी है! आज व्याख्यान के बाद कमलजी बाबूलालजी डूंगरवाल के निवास स्थान पर कल्पसूत्र का जुलूस पहुंचा रात्री में भक्ति प्रोग्राम रखा गया ।

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One comment

  1. बहुत अछा है।

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