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आज साध्वीजी म सा ने नवकार महामंत्र की महिमा बताई

निम्बाहेडा / (दीपक सेठिया) – 31 जुलाई राष्ट्रसंत गच्छाधिपति पूण्य सम्राट आचार्य श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराजा व आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सूरीश्वरजी महाराजा आज्ञकनुवर्ती से नगर में स्थित श्रीराजेन्द्र सूरी ज्ञान मंदिर परिसर के श्रीजयंत सभागार में चल रही नवकार आराधना के दूसरे दिन डॉ. प्रीति दर्शना श्रीजी ने नवकार महामंत्र की महिमा बताई । नवकार मंत्र में 68 अक्षर है प्रत्येक अक्षर पर एक हजार आठ विधा देवीका निवास है। साध्वी द्वारा बताया गया कि किस प्रकार इस लोक व परलोक के सात भय से नवकार जाप से मुक्ति मिलती है। निरंतर नवकार जाप के प्रभाव से सात भय दूर होते है। जिस तरह सुर्दान सेठ ने नवकार जाप से अपने आप को अर्जुन माली से बचाया । नवकार जपने से सात गुणों की प्राप्ति होती हैं मनुय निरतंर नवकार जाप से जड के प्रति उदासीन भावना व जीव के प्रति स्नेह भाव उत्पन्न होते हैं ।पंच परमेठी के जाप से पांचो इंद्रियों पर विजय प्राप्त हो सकती है। नवकार मंत्र की आराधना में 120 आराधक आराधना कर रहे है। नवकार मंत्र की आराधना को भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। आज व्याख्यान के प्रचात प्रभावना का लाभ संजय कुमार मनी कुमार बाबेल परिवार ने लिया ।

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