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निम्बाहेड़ा में साध्वीजी म सा के प्रवचन

निम्बाहेड़ा / (दीपक सेठिया) – राष्ट्रसंत गच्छाधिपति पूण्य सम्राट आचार्य श्रीमद विजय जयन्तसेन सुरीश्वरजी म सा के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी म सा व आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सुरीश्वरजी म सा की आज्ञकनुवर्ती से साध्वी जी श्री डा. प्रीति दर्शना श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 5 आज के प्रवचन में कलिकाल सर्वश प पूं हेमचन्द्राचार्य जी मः जीवन जीने की कला सिखाते हुए कहा है सदगृहस्थ को पाप भीरू होना चाहिए दुख से डरना कायरता हे पाप से डरना धर्मिकता है दुख के वही पाप हे पाप से ही दुख् उत्पन्न होता हे इस संसार में चार प्रकार के व्यक्ति होते है पहला पाप का दोषों का पक्षपात करता हे ओर धृष्ट ता पूर्वक पाप करता रहता हे वह मिथ्यात्वी कहालाता हे दुसरा पापो का दोषो का पश्चाताप होता हे दुखी मन् से पाप का सेवन करता हो ओर छोडने की भावना रखता हे 3 पाप का ड्रास करता जाता है धीरे धीरे जीवन मे से शवय ऐसे पापों का त्याग करता हे 4 पाप नाश एसा व्यक्ति जो साधना करके अपने सम्पूर्ण दोषों का नाश कर देता है अपने को भी पाप नाश कि भूमिका तक पहुंचना है इसके लिए आवश्क हे व्याख्यान के पश्चात प्रभावना का लाभ रमेश चंद जी संजय जी ओरा परिवार बड़नगर वालों ने लिया और दिलीप जी मोदी 21 सुषमा जी विरानी 21 पुलकित जी मोदी 18 उपवास तपस्या जारी हे संचालन रिखब जी विराणी ने किया

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