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त्रिदिवसीय संबोधिदायी दिव्य देशना सम्पन्न

जालोर / ( स्वस्तिक जैन)  – त्रिस्तुतिक जैन धर्मशाला में पुण्य सम्राट गुरूदेवेश श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म सा के सुशिष्यरत्न श्रुत प्रभावक मुनिराज श्री वैभवरत्न विजयजी म सा के त्रिदिवसीय प्रभावशाली प्रवचन का आयोजन 21-22-23 जून को सम्पन्न हुआ।

प्रथम दिन “विचारों की पगदंडियां” विषय पर प्रकाश डालते हुए पूज्यश्री ने फरमाया कि ह्रदय की शुद्धि आवश्यक है, क्योंकि बुद्धि को ह्रदय की आज्ञा में रहकर कार्य करना चाहिए और उसके लिए विचारों की विशुद्धता आवश्यक है। मोक्ष का राजमार्ग शुभ विचारों की पगदंडियों से होकर ही गुजरता है । विचारों की विमलता ही आत्मा की आदर्शता है ।
द्वितीय दिन “आशाओं के शिखर” विषय पर मुनिराज श्री ने कहा कि हमारी आशाएं अनंतगुना है, उनके पिछे भागना बंद करें। किसी से आशा रखना याने उसकी शर्तों के अनुसार चलना । जो कि गर्त का रास्ता है । आशाओं को त्यागने में युनिवर्सल पॉवर छुपा है । वहां हम स्व शक्ति से अपने कार्य को पूर्ण करने में लगे होते है, तो एक अदृश्य शक्ति हमें सहाय करती हैं।
तृतीय दिन “अस्तित्व की पुकार” विषय पर पूज्यश्री ने फरमाया कि हमें मान, सम्मान, अपमान से ऊपर उठकर ऐक्यता, औचित्यता, उदारता की शक्ति को उद्घाटित करना हैं। हमारे अस्तित्व की उपस्थिति तभी सिद्ध होगी जब परमार्थ से भरा हमारा जीवन होगा । आज तक अनेको आए और चले गए, लेकिन परमार्थी, पुरूषार्थी आत्माएँ ही अपने अस्तित्व की पुकार को जगत में गुंजित कर पाती हैं ।

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One comment

  1. बहुत हि अछा धर्मीक विषय हमे मिल रहा है। धन्यवाद । अशोक मेहता।श्री अंबीका हाँल. बी.एच.रोड़. बिरुर-५७७११६. कर्णाटक।

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